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Political Forecast Posted On: 12-02-2015
 

Bhavishyavani - Satish Sharma

हमारा देश - भारत की वृषभ लगA की कुण्डली में तीसरे भाव में पाँच ग्रह हंै, दूसरे और छठे में एक-एक ग्रह है तथा राहु- केतु लगA सप्तम अक्ष पर हैं। इस समय भारत सूर्य महादशा की शुक्र अन्तर्दशा में चल रहा है। शुक्र लगAेश हैं और तीसरे भाव में स्थित हंै, लगAेश जब तीसरे या छठे होते हैं तो सिंह के समान पराक्रम होता है। शुक्र अन्तर्दशा पर्यन्त जो कि सितम्बर 2015 तक चलेगी, भारत असाधारण पराक्रम का प्रदर्शन करेगा। चूंकि शुक्र भाग्य स्थान को देख रहे हैं अत: भाग्य फलेगा। शुक्र अस्त हैं इसलिए सब कुछ अच्छा ही अच्छा आएगा, ऎसा मानने का कोई कारण नहीं है। यह छिद्र दशा है जिसमें कुछ अशुभ परिणाम भी आने आवश्यक हैं परन्तु महादशा शानदार है। इस महादशा में भारत का अभ्युदय निश्चित है, यद्यपि कुछ समस्याएं चलती रहेंगी। जनवरी से मार्चपर्यन्त कई सहयोग सन्धियाँ होंगी। जनवरी मास में ही प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोत्तरी दिखने लग जाएगी। मार्च और अप्रैल में बजट के बाद भारत की अर्थव्यवस्था में अच्छे लक्षण दिखने लगेंगे। जिस समय संसद में बजट पेश होगा उस भारत सूर्य महादशा, शुक्र अन्तर्दशा और गुरू के प्रत्यंतर में चल रहा होगा। गुरू छठे भाव में ब्ौठे हैं जो कि घाटे की अर्थव्यवस्था की सूचना देते हैं। इस समय बजट को लेकर बहुत हंगामा होगा। भेदभाव के आरोप लगेंगे और बजट प्रस्तावों में संशोधन की मजबूरियाँ हो जाएंगी परन्तु 2 मई तक चलने वाले बृहस्पति के प्रत्यन्तर के कारण अप्रैल मास में ही भारत की ओर धन प्रवाह बहुत तेज हो जाएगा। ऎसा प्रतीत होता है कि केन्द्र सरकार की नीतियों के कारण, जो बजट सत्र से ही स्पष्ट हो जाएंगी, विदेशी निवेशकों में उत्साह भर जाएगा और वे अप्रैल मास में ही अपनी इच्छा प्रकट कर देंगे। भारत 2 मई से लेकर 29 जून तक शनि प्रत्यंतर में रहेगा। शासन पक्ष के लिए यह शानदार समय है। भारत की अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। यू.एन.ओ. में भारत की साख बढे़ेगी और सीमा क्षेत्रों पर भारत की पक़ड बढे़गी। शनि स्वभाव से विस्तारवादी हैं अत: भारत सीमा क्षेत्रों पर ब़डी मात्रा में सेना तैनात करेगा। सीमाओं पर तनाव रहेगा परन्तु भारत की तैनाती जारी रहेगी। शनि की दिशा पश्चिम है अत: पाकिस्तान बॉर्डर पर सेवा की तैनाती के कारण आतंकवादियों के सामने समस्या हो जाएगी और बहुत ब़डी मात्रा में घुसपैठिए और आतंकवादी मारे जाएंगे। इस समय भारत के कुछ नागरिकों के मारे जाने से भी हल्ल ा मचेगा। यह भविष्यवाणी की जाती है कि अप्रैल और मई महीने में भारत की ओर धन प्रवाह की गति तेज हो जाएगी और विदेशी निवेशक अत्यधिक भरोसा जताते हुए भारत सरकार से सम्पर्क स्थापित करने की कोशिश करेंगे। जुलाई और अगस्त में भारत बुध प्रत्यंतर दशा के अन्तर्गत रहेगा और इस समय भारत सरकार की नीतियों के कारण घरेलू मोर्चो पर ब़डी राहत मिलेगी। बजट का असर आता हुआ दिखेगा और सकल राष्ट्रीय उत्पादन बढ़ने के कारण और महंगाई सीमित नियंत्रण के कारण जनता राहत की सांस लेगी। इस समय अंतरिक्ष कार्यक्रम, सेना कार्यक्रम, वैज्ञानिक अनुसंधान और शोध संस्थाओं को ब़डी धनराशि मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर की कुछ संस्थाएँ देश का नाम रोशन करने का काम करेंगी। इस अवधि में कुछ ऎसे व्यक्तित्व उभर कर सामने आएंगे जिनकी प्रसंशा जनता और सरकार दोनों करेंगे। केन्द्र सरकार कुछ सौ व्यक्तियों को राष्ट्रीय धरातल पर उभारने की कोशिश करेगी, जो इस देश के लिए एक अद्भुत बात होगी। धीरे-धीरे पूरे देश को यह समझ में आ जाएगा कि कुछ पुराने लोगों से किनारा किया जा रहा है और नए लोग उनका स्थान ग्रहण कर रहे हैं। शुक्र अन्तर्दशा में बुध का प्रत्यंतर इस बात का प्रमाण है कि यह सब काम योग्यता के आधार पर ही होगा। अगस्त मध्य से सितम्बर मध्य के बीच में अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं पर तनाव रहेगा और कूटनीतिक मो़ड पर भारत को कई समस्याओं का सामना करना पडे़गा। सितम्बर, अक्टूबर और नवम्बर में कूटनीतिक मोर्चे पर बहुत समस्याएँ आएंगी। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को नीचा दिखाने की जबर्दस्त कोशिशें होंगी। भारत के विरूद्ध कार्यवाही में एक ब़डा देश भी शामिल रहेगा। भारत सरकार को अपने कूटनीतिक पैंतरें दिखाने पडे़ंगे। केवल भविष्यवाणियाँ-2015 सतीश शर्मा 2 रा 1 12 11 10 9 8 7 के गु 6 5 4 चं सू बुशु श 3 जनवरी- 2015भविष्यवाणियाँ-2015 5 दिसम्बर-2015 का महीना ऎसा है जिसमें भारत कूटनीतिक पैंतरों से विजय हासिल करेगा। वर्ष का अंतिम महीना सुखद घटनाओं से भरा हुआ है। यदि राजनीतिक पैंतरेंबाजियों को छो़ड दिया जाए तो भारत एक सशक्त राष्ट्र के रूप में उभर कर सामने आएगा। वर्ष के प्रारम्भ से ही वक्री बृहस्पति विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करते हैं और भारत को अन्तर्राष्ट्रीय संधियों के शुभ फल मिलने शुरू हो जाएंगे। इस समय भारतीय लगA से सप्तम में भ्रमण कर रहे शनि जन्म पत्रिका के भाग्यस्थान पर दृष्टिपात कर रहे हैं और भारत का अभ्युदय चाहते हैं। जैसे ही शनि अपने उच्च ा नवांश में प्रवेश करेंगे अर्थात् 11 फरवरी 2015 से, भारत की अर्थव्यवस्था विशेष गति पक़ड लेगी। यही शनिदेव जब 14 मार्च से वक्री होंगे तब भारत को अन्तर्राष्ट्रीय कूटनीति में घेरने की चेष्टा की जाएगी। चीन और पाकिस्तान की दुरभि संधि मार्च से लेकर जुलाईपर्यन्त भारत को बहुत परेशान करेगी और केन्द्र सरकार को बहुत राजनीतिक पैतरेंबाजी करनी पडे़गी। बडे़ राष्ट्रों से समर्थन के बावजूद भारत को अपनी रक्षा स्वयं ही करनी पडे़गी और सीमाओं पर भारी खर्चा करना पडे़गा। भारत पर ग्रहों का गोचरीय प्रभाव - जब-जब भी बृहस्पति और शनि एक साथ वक्री होते हैं तो इतिहास में स्थान बनाने वाली घटनाएँ घटती हैं। इस वर्ष 14 मार्च से 8अप्रैल तक दोनों ग्रह एक साथ वक्री रहेंगे (शनि 14 मार्च से 1 अगस्त और बृहस्पति वर्ष के आरम्भ से लेकर 8अप्रैल तक)। बृहस्पति 8अप्रैल को मार्गी हो जाएंगे और शनि अकेले ही वक्री रहेंगे। यह भविष्यवाणी की जाती है कि फरवरी के बाद से ही विश्व के कुछ देश युद्ध परिस्थितियों में उलझ जाएंगे तथा उसका असर भारत पर भी आएगा। भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होगा। अमेरिका की ईरान, इराक और अफगानिस्तान के क्षेत्रों में कूटनीतिक और युद्ध विफलता के कारण भारत की भूमिका बढ़ जाएगी और पाकिस्तान के साथ तीखे रिश्ते शुरू हो जाएंगे। अब भारत आर-पार की ल़डाई ल़डने के उद्देश्य से पाकिस्तान के छद्म युद्ध को ज़ड से नष्ट करने के लिए कार्यवाही करेगा। यह भी भविष्यवाणी की जाती है कि भारत के जासूसी संगठन वर्ष 2015 में जासूसी के इतिहास का सबसे ब़डा एपिसोड रचेंगे। कन्या राशि के राहु की अवधि में भारत-पाकिस्तान के जासूसी तंत्र और आई. एस (अफगानिस्तान स्थित आंतकी संगठन) में घुसपैठ कर लेगा और अमेरिका से अलग स्वतंत्र कार्यवाही करते हुए आंशिक सफलता प्राप्त करेगा। जुलाई के बाद बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे जो कि भारत के सकल राष्ट्रीय उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि की सूचना दे रहे हैं। भारत में तीव्र गति से धन प्रवाह होगा, विदेशी निवेशक खुल कर सामने आएंगे और चीन को नई चिन्ता चढ़ जाएगी। 26जुलाई से भारत राष्ट्रीय गौरव को ऊँचा उठाने के लिए कुछ विशेष प्रयास करेगा। अगले आने वाले एक-दो महीनों में भूतल परिवहन, जहाजरानी, थल सेना में विशेष वृद्धि होगी और पदाति सेना में बढ़ोत्तरी के लिए विशेष विधान किए जाएंगे। अगस्त के महीने में कर्क से कन्या राशि तक शुभ ग्रहों की उपस्थिति भारत के राष्ट्रीय वातावरण में बदलाव लाने वाली है। सम्भवत: प्रबल राष्ट्रवाद की लहर देश में चलेगी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इसका लाभ मिलने वाला है। भारत सरकार बहुत शक्तिशाली हो जाएगी और आक्रामक कूटनीति का प्रयोग करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्यवाही करेगी। ठीक इसी समय सरकार के एक-दो मंत्री बचकाना हरकतें करेंगे और दण्ड के अधिकारी हो जाएंगे। इस वर्ष रोहिणी का वास समुद्र में है जो कि भारी वर्षा का संकेत है। भारी वर्षा से देश के कई भागों में बाढ़ की परिस्थितियाँ पैदा हो जाएंगी। बम्बई, आंध्रप्रदेश, बिहार के सीमावर्ती राज्यों के कुछ हिस्से बुरी तरह से प्रभावित होंगे। गंगा और यमुना भी खतरे के हिस्सों को पार कर जाएंगी। देश के कई भागों में जलह्रश्वलावन होगा। रोहिणी का वास जब समुद्र में होता है तो कई-कई दिन तक सूर्य नहीं निकलता और जन-धन की भारी हानि होती है परंतु यही योग देश भर में कृçष्ा उत्पादन को बढ़ावा देगा तथा भूमिगत जल स्तर को उठाएगा। मनुष्यों को पर्याप्त खाद्य सामग्री मिलेगी और पशुओं को चारा। समय का वास धोबी के घर होगा, इसका अर्थ यह है कि लगातार वर्षा होती रहेगी, रिम-झिम चलती रहेगी कप़डे नहीं सूखेंगे और बच्च ाों की स्कूल डै्रस सुखाने के लिए धोबी की प्रेस काम आएगी। धोबी एक प्रतीक वर्ग है और इस वर्ग में अधिक वर्षा से लाभ उठाने वाले वर्ग लाभांवित होंगे। जैसे कि - मकान की मरम्मत, छाता बेचने वाले, फास्ट-फूड वाले, स़डक व नाली दुरूस्त करने वाले, ऑटो या टैक्सी वाले, स्कूटर या ऑटो के मिस्त्री, स्कूल ड्रेस और जूते बेचने वाले, साग-सब्जी वाले और ऎसे ही वर्ग जो मेहनतकश हंै। समय का वास जब धोबी के घर होता तो समृद्धि अमीर वर्ग से श्रमिक वर्ग की ओर आती है। लक्ष्मी जी सीढ़ी उतर कर नीचे आती हैं। 22 जून को सूर्यदेव आद्राü नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसके कारण वर्षा खूब होगी और धन-धान्य की पैदावार काफी होगी। बृहस्पति और शुक्र नवम होने के मौसम और वर्षा - रोहिणी वास - आद्राü प्रवेश नक्षत्रजनवरी- 2015भविष्यवाणियाँ-2015 6 कारण काफी सामग्री का निर्यात किया जाएगा, जिसके कारण उनके मूल्यों में तेज आएगी। आवश्यक अन्न, फल और साग- सब्जी में मंदी आएगी परंतु बहुत सारी अन्य वस्तुओं में तेजी आएगी। अष्टम भाव में सूर्य और मंगल एक साथ होने से आंधी, तूफान भी काफी आएंगे और वर्षा के मौसम में कहीं- कहीं बादल फटेेगे। दोनों अगिA तत्व ग्रह अष्टम भाव में एक साथ होने के कारण असमान वर्षा के योग हैं। किसी क्षेत्र में तो भारी वर्षा होगी और कहीं-कहीं अकाल की स्थिति हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी गजकेसरी योग की दशा-अन्तर्दशाओं में चल रहे हैं। गजकेसरी योग में व्यक्ति हाथी जैसी शक्ति और सिंह जैसी बुद्धि और चपलता का प्रदर्शन करता है। इस समय प्रधान मंत्री भारत के पक्ष में बहुत आक्रामक मार्केटिंग कर रहे हैं जो कम से कम पाकिस्तान और चीन को अखर रहा है और अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। जनवरी से मार्च तक शनि प्रत्यंतर दशा में नरेद्र मोदी अद्भुत राजनयिक का परिचय देंगे। इस अवधि में सीमाओं की रक्षाओं के लिए अभूतपूर्व कदम उठाएंगे। चीन, पाकिस्तान और बांगलादेश की सीमाओं पर ब़डी संख्या में सेनाओं की तैयारी होगी। आगामी रक्षा बजट पहले से ब़डा होगा। 14 मार्च को जब शनि वक्री होंगे नरेन्द्र मोदी घरेलू और अन्तर्राष्ट्रीय मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रहे होंगे। इन महीनों में वे भारत को एक अन्तर्राष्ट्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करने में राजनैतिक भविष्य - सफल रहेंगे, चूंकि मेदिनी ज्योतिष्ा के हिसाब से भारत की वृषभ लग्न की कुण्डली का नरेन्द्र मोदी की लगA से सम-सप्तक है। नरेन्द्र मोदी अमेरिका और रूस के बीच में भारत पर प्रभाव को लेकर परस्पर प्रतिस्पर्द्धा करा देेगे। मार्च से मई तक आर्थिक मामलों में विशेष गतिविधियाँ देखने को मिलेंगी बजट का प्रस्तुतिकरण इस ढंग से करा पाएंगे जिससे कि अन्तर्राष्ट्रीय निवेश को बढ़ावा मिले। मई के बाद अन्तर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेन्सीज भारत के बारे में अपनी राय बदलने को मजबूर हो जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए सबसे कठिन समय 28मई से 14 सितम्बर तक का है। जिसमें अन्तर्राष्ट्रीय कूटनीतिक मोर्चे पर कुछ कठिनाइयों का सामना करना प़डेगा और अपने मंत्रियों की कारस्तानियों को झेलना प़डेगा। इस केन्द्र सरकार का शपथ मुहूर्त कुछ अच्छा नहीं था और राज्याभिषेक के ज्ञात सिद्धान्तों के थो़डा विपरीत था। मई से सितम्बर की अवधि में मुहूर्त दोष के कारण जो परिणाम आएंगे, उनमें दो मंत्रियों पर गम्भीर आक्षेप आएंगे। प्रधान मंत्री को उनका समाधान करना ही प़डेगा। वर्ष के अंतिम महीने नरेन्द्र मोदी के लिए अच्छे जाने वाले हैं, वे बाधाओं के साथ परंतु यशस्वी शासन करेंगे। दिसम्बर का महीना थो़डा कठिनाइयों वाला है जब उनके साथ का कोई व्यक्ति धोखा देगा। इसकी विस्तृत चर्चा हम अपने नव-संवत् के भविष्यवाणी विशेष्ाांक में करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सर्वाधिक कठिन समय 2015 का बजट सत्र है जब उन्हें वक्री शनि के कारण संसद में नीचा देखना प़डेगा या समझौते करने प़डेंगे। श्री आडवाणी वृश्चिक लग्न के हैं और वर्तमान में शनि महादशा में केतु अन्तर्दशा के प्रभाव में चल रहे हैं। 8जुलाई से उनको शुक्र अन्तर्दशा चलेगी जो कि काफी समय तक रहेगी। शुक्र अन्तर्दशा श्री आडवाणी जी की मारक अन्तर्दशा है और शुभ परिणाम नहीं देगी। इस अवधि में उन पर कई आक्षेप आएंगे जिसके कारण उनकी प्रतिष्ठा को हानि पहुंचेगी। वर्ष 2015 में प्रधान मंत्री उनके प्रति कुछ नरम रूख रखने लगेंगे परंतु अचानक फिर कोई नई बात आ जाएगी। श्री आडवाणी जी को मारक अन्तर्दशा में महामृत्युंजय का पाठ करना चाहिए और सूर्य का षड्बल कम होने के कारण अंगुली में माणक धारण करना चाहिए। श्री राजनाथ सिंह को राहु महादशा चल रही है और बुध अन्तर्दशा के तहत 14 जुलाई तक रहेगे उसके पpात् वर्षपर्यन्त राहु में केतु अन्तर्दशा चलेगी। लाल कृष्ण आडवाणी - राजनाथ सिंह - जनवरी- 2015भविष्यवाणियाँ-2015 7 बुध अन्तर्दशा तक सब कुछ ठीक-ठाक चलेगा, वे वक्री शनि के प्रभाव को भी झेल जाएंगे परंतु 14 जुलाई के बाद केतु अन्तर्दशा आते ही शनि देव वक्री मिलेंगे और 1 अगस्त तक रहेंगे अत: जुलाई-अगस्त का समय श्री राजनाथ सिंह के लिए थो़डा कठिन है। उन पर लगातार आक्षेप आएंगे और किसी-किसी मामले में उन्हें रक्षात्मक मुद्रा अपनानी प़डेगी। अमित शाह नरेन्द्र मोदी की पदाति सेना के नायक हैं। हम उनकी चंद्र कुण्डली ही प्रकाशित कर रहे हैं। वे इस समय राहु महादशा के अन्तर्गत केतु अन्तर्दशा के तहत चल रहे हैं और जुलाई 2015 से शुक्र अन्तर्दशा के अन्तर्गत आ जाएंगे। उनकी जन्म पत्रिका में शुक्र अत्यंत शक्तिशाली हैं, इसमें उनका भाग्य उदय होगा और उन तीन वर्षो में वह अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति पाएंगे। उनकी कुण्डली में शुक्र तकलीफदेह भी हैं, एक तरफ भाग्य बढ़ाते हैं तो दूसरी तरफ कानूनी जाल में फंसाते हैं। शुक्र के प्रत्यंतर दशा के प्रभाव में ही वे 2010 में जेल में गए। यह दशा फिर से उन्हे परेशान करने लगेगी। सम्भवत: 2015 का उत्तरार्द्ध उनके भाग्य में असीमित सत्ताधिकार के साथ-साथ कुछ कानूनी समस्याएं भी लेकर आ रहा है। श्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख मोहरों में से एक श्री ओमप्रकाश माथुर इस समय उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रभारी हैं और अमित शाह के द्वारा छो़डी गई विरासत को वर्तमान में कूटनीतिक रंग दे रहे हैं। अगर अमित शाह- ओमप्रकाश माथुर - अमित शाह भाजपा का फ्रंटऑफिस सम्भालते हैं तो बैक ऑफिस सम्भालने में श्री माथुर की योग्यता सामने आई है। इस समय वे शुक्र महा दशा में शनि अन्तर्दशा के प्रभाव मे चल रहे हैं। शनि उनके सप्तमेश हैं और चन्द्र लगAेश हैं। उनकी कुण्डली के सर्वाधिक शक्तिशाली ग्रह शनि उन्हें राजनैतिक सहयोगियों को बढ़ाने में मदद करेंगे और उत्तर प्रदेश की चुनावी तैयारी में उन्हें आगे बढ़ाएंगे। बृहस्पति के सिंह राशि में आने के बाद अर्थात् जुलाई के बाद उनका राजनैतिक महत्व केन्द्र सरकार में बढ़ता हुआ नजर आ रहा है, इसका प्रमाण मई के बाद से ही मिलना शुरू हो जाएगा। शनि की प्रवृत्ति अनंत विस्तार की है अत: श्री ओमप्रकाश माथुर जहां-जहां रहेंगे, भाजपा का विस्तार होता रहेगा। श्री सोनिया गांधी को केतु महादशा चल रही है और यह नवम्बर 2019 तक चलेगी। 2015 में वे चंद्रमा, मंगल और राहु अन्तर्दशाओं के प्रभाव में रहेंगी। चंद्रमा में उनके ऊपर आक्षेप आएंगे। कानूनी जवाबदेही बढ़ेगी, सरकारी एजेन्सीज पूछताछ कर सकती हैं, यद्यपि बृहस्पति अनुकूल सोनिया गांधी - हैं परंतु कठिनाइयाँ बढ़ेंगी। जितने आक्षेप उन पर आएंगे उतना ही वह आक्रामक होती चली जाएंगी। श्रीमती सोनिया गंाधी की प्रहारक क्षमता मंगल अन्तर्दशा में बढ़ेगी जिसका समय 13 मई से 9 अक्टूबर है। यह समय राहुल गांधी के लिए भी अच्छा है परंतु राजनैतिक घेराबंदी में रहेंगे और व्यक्तिगत फाइलें खुलने का डर है। इस अवधि में सोनिया गांधी कांग्रेस में अंदर के शत्रुओं को निस्तेज करने में सफल रहेंगी। वे उस लॉबी के विरूद्ध क़डे कदम उठाएंगी जो कि उनके विरूद्ध सक्रिय हो चुकी है। राहु अंतर्दशा उनके लिए कठिन है जो कि अक्टूबर से लेकर वर्ष पर्यन्त रहेंगी, उस अवधि में उन पर गम्भीर आक्षेप आएंगे। श्रीमती सोनिया गांधी की जन्म-पत्रिका के अनुसार राहुल गांधी के कष्ट वक्री शनि की अवधि में बढ़ेंगे जो कि 14 मार्च से 1 अगस्त कर वक्री रहेगे। श्री राहुल गांधी चंद्रमा की महादशा के अन्तर्गत चल रहे हैं और शुक्र अन्तर्दशा 2015 पर्यन्त रहेगी। चूंकि शुक्र पंचमेश हैं और शुक्र का षड्बल उनकी कुण्डली में सर्वाधिक है अत: उनकी पद-प्रतिष्ठा बनी रहेगी। उनकी मिथुन लगA की कुण्डली में चंद्रमा द्वितीयेश हैं और शुक्र दूसरे भाव में बैठे हैं अत: प्रबल मारक प्रभाव चल रहा है। किसी सम्भावित घटना से बचने के लिए उन्हें महामृत्युंजय का ब़डा अनुष्ठान करवाना चाहिए

 
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Pages : 468
Price : 370
 
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